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बस्ती में हरियाली का कत्लेआम: गौर क्षेत्र बना लकड़ी माफियाओं का ‘कुरुक्षेत्र’

सफेदपोशों की शह पर सुलगता गौर: विभाग की नाक के नीचे माफियाओं का 'कुल्हाड़ी तंत्र'

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: गौर बना लकड़ी माफियाओं का ‘कुरुक्षेत्र’, सिस्टम की नाक के नीचे कट रही हरियाली

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

  • रक्षक ही भक्षक? रामनगर वन रेंज में माफिया-पुलिस की ‘जुगलबंदी’ से साफ हो रही हरियाली
  • सिस्टम फेल, माफिया पास: गौर ब्लॉक में दिनदहाड़े पर्यावरण की ‘फांसी’
  • कुंभकर्णी नींद से जागा वन विभाग: खबर चलते ही दर्ज हुए मुकदमे, पर सवाल अब भी बरकरार
  • दिखावे की कार्रवाई या सच में शिकंजा? ठेकेदार अफजल के ठिकाने पर छापे से मचा हड़कंप
  • रामनगर वन रेंज में ‘लकड़ी का खेल’: क्या साहबों की जेबें भरने के लिए कट रही है हरियाली?
  • कछिया और हलुआ बाजार में माफियाओं का तांडव: जानकी प्रसाद के यहाँ से लकड़ी बरामद
  • गाँवों की हरियाली पर ‘अजगर’ की नज़र: गौर में पाँच शीशम और एक नीम पर चली कुल्हाड़ी
  • छितहा और भटपूरवा में ‘लकड़ी सिंडिकेट’ सक्रिय: जिम्मेदारों की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह

बस्ती। जनपद का गौर ब्लॉक इन दिनों विकास के लिए नहीं, बल्कि हरियाली के ‘कत्लेआम’ के लिए चर्चा में है। गौर क्षेत्र लकड़ी माफियाओं का सुरक्षित अड्डा बन चुका है, जहाँ दिनदहाड़े कुल्हाड़ियों की गूँज सुनाई देती है, लेकिन इस गूँज को सुनने वाले कान (प्रशासन) शायद ‘सुविधा शुल्क’ की रुई ठूँसकर सो रहे हैं। वन रेंज रामनगर के अंतर्गत आने वाले इस इलाके में माफियाओं का हौसला इतना बुलंद है कि अब उन्हें जंगल की जरूरत नहीं रही; वे अब गाँवों की हरियाली को अपना निवाला बना रहे हैं।

दिखावे की कार्रवाई या सच में जागेगा विभाग?

सोशल मीडिया और खबरों के माध्यम से मामला गरमाने के बाद कुंभकर्णी नींद से जागे विभाग ने आनन-फानन में दो मुकदमे तो दर्ज किए हैं, जिससे इलाके में हड़कंप जरूर मचा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ जनता का मुँह बंद करने के लिए है, या उन सफेदपोशों पर भी नकेल कसी जाएगी जिनकी शह पर यह काला कारोबार फल-फूल रहा है?

इन ठिकानों पर हुई छापेमारी, खुलासे ने उड़ाए होश

विभागीय कार्रवाई के दौरान कछिया भरपूरवा निवासी जानकी प्रसाद के यहाँ से अवैध लकड़ी बरामद हुई है। वहीं, क्षेत्र के कुख्यात लकड़ी ठेकेदार अफजल के ठिकाने पर मारे गए छापे ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी।

  • नुकसान का विवरण: माफियाओं ने पाँच विशाल शीशम और एक नीम के पेड़ को काटकर पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है।
  • प्रभावित इलाके: कछिया, भटपूरवा, छितहा और हलुआ बाजार इस समय लकड़ी माफियाओं की ‘हॉटस्पॉट’ लिस्ट में हैं।

“जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो हरियाली कैसे बचेगी? रामनगर वन रेंज में पेड़ों की अवैध कटान यह साबित करती है कि वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत के बिना यह ‘लकड़ी का खेल’ मुमकिन नहीं है।”

सिस्टम पर तीखे सवाल

  • दिनदहाड़े कटान: आखिर क्या वजह है कि जब पेड़ कटते हैं, तो जिम्मेदारों को खबर नहीं लगती और खबर छपने के बाद अचानक विभाग ‘एक्शन मोड’ में आ जाता है?
  • संदेह के घेरे में जिम्मेदार: रामनगर वन रेंज में धड़ल्ले से हो रही कटान क्या विभागीय अधिकारियों की अक्षमता है या उनकी ‘मौन स्वीकृति’?
  • सिर्फ प्यादों पर गाज क्यों?: पकड़े गए लोग तो महज मोहरे हैं, असली ‘शतरंज के खिलाड़ी’ यानी बड़े माफिया और उनके आकाओं तक कानून के हाथ कब पहुँचेंगे?

निष्कर्ष: गौर ब्लॉक में हो रही यह कटान केवल पेड़ों की हत्या नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अगर अब भी सख्त और ईमानदार कार्रवाई नहीं हुई, तो बस्ती की यह ‘हरियाली’ सिर्फ कागजों और यादों में ही शेष बचेगी। जनता अब जवाब चाहती है—दिखावा नहीं, समाधान चाहिए!

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